इक जहाँ मैं बना दूँ

 

इक जहाँ मैं बना दूँ तुम्हारे लिए

छोड़ दो सारी दुनिया हमारे लिए

 

भावना प्यार की अनमोल है बड़ी 

पूजा प्यार की करो तुम हमारे लिए

 

चाहे कोई भी रोके तुम्हारे कदम

तुम लगाओगी ठोकर हमारे लिए

 

प्यार की इक मिसाल शीरीं फ़रहाद भी

याद करता जमाना हमारे लिए

 

ज़िन्दगी है अगर चार दिन की सही

हौसला तुम बढा़ओ हमारे लिए

 

ताने लोगों के मिलते बहुत हैं मगर

ताने सहना है तुमको हमारे लिए

 

शायद माने नहीं ये दुनिया के लोग

तुम सदा गीत गाओ हमारे लिए

 

रवीन्द्र नाथ सुलंकी

www.hindikinailipi.com

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