एतराज है अगर

 

एतराज है अगर नाम तेरा दिल से मिटा दूँ

तुम कहो तो सही तस्वीर घरौंदे की मिटा दूँ

 

मौसम ने खायी है कसम आते हैं सर्द झोंके

तुम कहो तो सही कंडे मैं दो -चार जुटा दूँ

 

किसी की क्या मजाल जो खुशी के उद्गार को रोके

तुम कहो तो सही दुनिया से ग़म का नाम मिटा दूँ

 

किनारा कर लिया जिसने भी खायी पाँव में ठोकर

तुम कहो तो सही हसरतें चाहत में लुटा दूँ

 

उम्र कैद की सुनवाई में इतनी देर भला क्यों है

तुम कहो तो सही ये मामला निबटा दूँ

 

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