कहानी कैसे लिखें ?/ How to Write a Story

 

 

“ एक प्रतापी राजा मर गया ”

आप कहेंगे यह तो एक साधारण सा वाक्य है .कोई सुविचार भी नहीं .किसी महापुरुष की उक्ति भी नहीं .फिर यह कहानी कैसे है ?

एक प्रतापी राजा होने के कारण उसके पास सभी ऐश्वर्य ,धन –सम्पति , सुख -सुविधाएं ,वैद्य –चिकित्सक होते हुए भी उसकी मृत्यु हो गई .वह अमर नहीं था .इतना सब कुछ रहने के वावजूद राजा की मृत्यु हो गई .इस संसार में अपने पद और धन का अहंकार करने वाले की भी मृत्यु होगी .फिर अहंकार क्यों ?यह इस कहानी का सार है .इसी को आप और घटना क्रम जोड़ कर एश्वर्य और धन प्राप्ति की उत्कट इच्छा को दिखला सकते हैं .भौतिक सुख सुविधा

के लिए असंख्य सही –गलत कार्य करते हैं .लेकिन अंत में दुनिया से कुछ भी लेकर नहीं जाते .सब कुछ यहीं धरा का धरा रह जाता है .

तो पहली बात –कहानी में कोई सन्देश अवश्य होना चाहिए .सन्देश सकारात्मक होना चाहिए .जिसमें समाज के नैतिक स्तर को ऊँचा

उठाने वाले सन्देश हों .समाज में नफरत फ़ैलाने वाले नकारात्मक सन्देश न हों .

दूसरी बात –कहानी का प्रारम्भ पाठक के मन में उत्सुकता जगाने वाला होना चाहिए तभी तो कोई आपकी पूरी कहानी पढ़ेगा .जैसे :—

1 .” सेठ मगनलाल के घर में पुलिस का छापा पड़ा तो शहर में सनसनी फ़ैल गई .”

2 .”बच्चे को गहने चुराते हुए मालिक ने रँगे हाथों पकड़ा .”

3 .”पता चला कि सेठ मगनलाल की जवान बीवी अपने नौकर के साथ भाग गई .”

तीसरी बात – कहानी के मुख्य हिस्से में कुछ घटनाक्रम जोड़ें .कुछ पात्रों की भी भूमिका हो .ध्यान रखें कि अधिक घटनाओं का  व्योरा न हो .अनावश्यक पात्र भी मत गढ़िये .नहीं तो

पाठक इन्हें याद नहीं रख पायेंगे और आधी कहानी पढ़ कर छोड़ देंगे .

चौथी बात – कहानी के पात्रों के बीच वार्तालाप होने चाहिए .ध्यान दें कि बोली का प्रयोग करें भाषा का नहीं .जैसे :—

भाषा – “विलम्ब न करें अब प्रस्थान करना चाहिए .”

बोली – “देर न करो अब चलना चाहिए .”

संवाद छोटे और प्रभावी होने चाहिए .संवाद अस्वाभाविक न लगे .

पांचवी बात – वातावरण और परिस्थिति को दिखाने के लिए वाह्य चित्रण होना चाहिए .जैसे :– “ गाँव की पगडण्डी में मैं धीरे –धीरे अपने घर की ओर जा रहा था .रात  के बारह बज रहे थे .आकाश में चाँद न था .सिर्फ तारों की रोशनी थी .पगडण्डी के अगल –बगल घास और झाड़ियाँ उगी थीं .विषैले सांप –बिछुओं का डर बना हुआ था .झिन्गूरों की आवाजें वातावरण को भयावह बना रही थी .”

छटवीं बात –पात्रों के मनोभावों का चित्रण आंतरिक चित्रण होता है .यह भी जरूरी है .तभी पाठक पात्रों के साथ जुड़ पायेंगे .सहानुभूति ,क्रोध नफरत इत्यादि भावनाओं की अनुभूति पाठक को भी होगी .

जैसे :– “मन तो कर रहा था कि जोर –जोर से चिल्ला कर कहे कि मेरा ये शरीफ दिखने वाला मालिक बहुत ही दुष्ट आदमी है .दिन के दस –बारह घंटे जानवरों की तरह खटाता है लेकिन पिछले पांच महीने से पगार के नाम पर एक पैसा भी नहीं दिया है कमीने ने .दवा वाले से माँ की दवाई उधार में लेते रहे हैं .अब उसने भी मना कर दिया है .अगर मेरी माँ दवा बिना मर गई तो यह कमीना भी बेमौत मरेगा .कीड़े पड़ जाए और तिल-तिल कर मरे .”

सातवीं बात –कहानी के बीच में कोई एक संघर्ष या द्वंद्व होना चाहिए .उसमें सकारात्मक और नकारात्मक विचारों के बीच संघर्ष दिखाना है .ऐसे में पाठक पूरी तरह से कहानी के घटनाक्रम और पात्रों के भावनात्मक तौर पर जुड़ जाता है .जैसे :—

“मैं जानता हूँ कि जिसके घर से मैं गहने चुराना चाहता हूँ वह एक विधवा है .आंगनबाड़ी में काम करती है .उसने अपनी बेटी की शादी के लिए सोने का हार या चेन खरीदी है . वह तो काम –धंधा करती है .चोरी कर भी लूं तो वह फिर से खरीद लेगी .और अगर मैं चोरी न करूँ तो मोबाईल फोन कैसे खरीदूंगा ?मेरे स्कूल के सभी साथियों के पास फोर जी वाले फोन हैं .मेरा बाप मुझे कभी भी मोबाइल के पैसे नहीं देने वाला है .मैं अच्छी तरह जनता हूँ .दारू पीना अगर छोड़ देते तो सब कुछ हो जाता .मुझे मोबाइल फोन न मिला तो डिप्रेशन में चला जाऊँगा .”

आठवीं बात –कहानी का चरम बिंदु कहानी का अंतिम हिस्सा होता है .शुरू से बनी उत्सुकता का अंत एक उत्तेजना के साथ होना चाहिए .पाठक सोचता है आगे क्या होगा ?जैसे :– “दिन के ग्यारह बजे थे .पडोस वाली औरत अपने काम में  जा चुकी थी .उसकी बेटी स्कूल गई हुई थी .मौका था .मुझे पता था कि पिछले दरवाजे कि सिटकिनी ठीक से लगती नहीं है .मैंने जोर से दरवाजे को धकेला तो दरवाजा खुल गया .लोहे का संदूक था .ताला नहीं लगा था .संदूक खोला .कपड़ों के नीचे मुझे सोने की चेन की डिबिया मिल गई .मैं तेजी से अपने घर लौट आया .मेरे घर में भी उस समय कोई नहीं था .माँ राशन लेने गई थी और मेरा बाप काम पर गया था .मेरे दिल की धड़कन हथौड़े के चोट के सामान चल रही थी और साँस धौंकनी की तरह .मैं शातिर चोर तो नहीं हूँ .घड़े से पानी निकल कर पिया और खाट पर बैठ गया .”

इतना पढ़ने के बाद पाठक देखेगा कि कहानी और कितनी बची है .वह जल्द से जल्द आगे की कहानी जानना चाहेगा .

कहानी के अंत में कोई अच्छा सन्देश देना है .चोरी करने के बाद किस तरह ग्लानि होती है और गहने लौटने के लिए पड़ोस के दरवाजे पर बैठ कर रोने लगता है .

 

 

 

 

 

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