जन्म -कुंडली क्या है ? / HOROSCOPE

बच्चा/ बच्ची के जन्म के समय आकाश में ग्रहों की स्थिति  किस राशि में है. यही जन्म कुण्डली में दर्शाया  जाता है . थोड़ा और विस्तार से जानें.

   नौ ग्रह  – इन ग्रहों का प्रभाव मनुष्य पर ‘दशा’ के अनुसार होता है. दशा की जानकारी आगे दूंगा .

  1. सूर्य – सूर्य स्थिर ग्रह है . इसी के चारों ओर अन्य ग्रह अनवरत घूमते रहते है . कुंडली में सूर्य की स्थिति देख कर जातक ( जिस व्यक्ति की कुंडली है  उसे जातक कहते हैं.) के प्रतिष्ठा ओर यश के बारे में जाना जाता है . ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है .
  2. चंद्र – चन्द्र वास्तव में पृथ्वी का उपग्रह है . लेकिन ज्योतिष में ग्रह माना जाता है .
  3. मंगल – मंगल ग्रह को सेनापति की संज्ञा देते हैं . यह लाल रंग का ग्रह है. इस ग्रह से जातक के पराक्रम और साहस की जानकारी लेते है . मंगल सूर्य की परिक्रमा 21 महीनों में पूरा करता है .
  4. बुध – सूर्य का निकटतम ग्रह बुध है. बुध की स्थिति से जातक के व्यवसाय की जानकारी लेते है. बुध 88 दिनों में सूर्य की परिक्रमा पूरी करता है .
  5. गुरु ( वृहस्पति ) – कुंडली में गुरु की स्थिति से जातक के ज्ञान ओर विद्वता के बारे में समझा जाता है. यह एक शुभ ग्रह है. गुरु से विवाह, शिक्षा और धन के बारे में जानकारी मिलती है.
  6. शुक्र – शुक्र को सुबह या शाम का तारा कहा जाता है. आकाश में यह काफी चमकीला दिखता है. इसे शुभ ग्रह माना जाता है. इससे जातक के भोग- विलास की स्थिति को देखते है. यह 8 महीने में सूर्य की परिक्रमा पूरी करता है.
  7. शनि – सूर्य से अधिक दूरी में होंने के कारण शनि को सूर्य की परिक्रमा करने में लगभग 30 साल लगते है. जातक के दुःख ,प्रसिद्धि और समृधि को देखा जाता है .
  8. राहु – राहु कोई आकाशीय पिण्ड नही है . इसे शनि का छाया ग्रह मानते हैं . राहु से जातक के आकस्मिक लाभ- हानि को देखते हैं . इसे राजनीति का ग्रह मानते हैं .
  9. केतु – केतु भी कोई आकाशीय पिंड नहीं है. इसे मंगल का छाया ग्रह माना जाता है .

                   12 राशियाँ

आकाश में ग्रहों के परिकर्मा पथ को 360 डिग्री माना गया है ( एक वृत्त की तरह) और इसे 108 भागों में बांटा गया है . फिर 108 भाग को 12 राशियों में रखा गया . यों समझें कि पूरा आकाश 12 राशियों में बांटा गया है और प्रत्येक राशि के 9 भाग किये गए हैं जो निम्नलिखित हैं

 

          राशि का नाम  —  राशि स्वामी

 

  1.           मेष   ————- मंगल
  2.           वृष   ————–  शुक्र
  3.           मिथुन  ———-   बुध
  4.           कर्क   ———–   चन्द्र
  5.            सिंह   ————  सूर्य
  6.           कन्या   ———   बुध
  7.           तुला   ————  शुक्र
  8.          वृश्चिक   ——— मंगल
  9.             धनु   ————-  गुरु
  10.           मकर   ———-   शनि
  11.           कुम्भ   ———-   शनि
  12.            मीन    ———-   गुरु

                    27 नक्षत्र

12 राशियों के 108 भाग 27 नक्षत्रों के हैं  . ऐसा समझें कि आकाश 27 नक्षत्रों का है . प्रत्येक नक्षत्र के चार भाग होते हैं . इसे चरण भी कहते हैं . एक राशि में सवा दो नक्षत्र होते हैं.

     नक्षत्रों के नाम        स्वामी ग्रह

  1. अश्विनी ————-  केतु
  2.   भरणी—————   शुक्र
  3.   कृतिका ————   सूर्य
  4. रोहिणी ————-   चंद्र
  5. मृगशिरा ———–   मंगल
  6.   आर्द्रा ————–    राहु
  7. पुनर्वसु  ———-    गुरु
  8.   पुष्य ————–    शनि
  9. आश्लेषा ———-    बुध
  10. मघा ————    केतु
  11. पूर्वा –फाल्गुनी —-  शुक्र
  12. उत्तरा –फाल्गुनी —- सूर्य
  13. हस्त ————–   चंद्र
  14. चित्रा ————–   मंगल
  15. स्वाति ————    राहु
  16. विशाखा ———-     गुरु
  17. अनुराधा   ———   शनि
  18. ज्येष्ठा   ——–     बुध
  19. मूल —————     केतु
  20. पूर्वा- षाढ़ा ———-   सूर्य
  21. उत्तरा –षाढ़ा———-    सूर्य
  22.  श्रवण  ————-   चन्द्र
  23.   घनिष्ठा  ———   मंगल
  24.   शतभिषा  ——–     राहु
  25. पूर्वा –भाद्रपद —–    गुरु
  26. उत्तरा –भाद्रपद —-    शनि
  27.  रेवती ————-     बुध

 

 

 

                कुंडली के 12 भाव

कुंडली में भावों का क्रम वामावर्त ( एंटी क्लॉक वाइज ) दिया जाता है . प्रत्येक भाव का नाम और इनके द्वारा विचार करने वाली बातें /विषय निम्नलिखित हैं .

नाम                  विषय                                     पहला भाव —  लग्न ———-    जातक का व्यक्तित्व

दूसरा भाव— धन ,कुटुंब ———–     पैतृक धन

तीसरा भाव— पराक्रम  ————  पराक्रम ,भाई –बहन

चौथा भाव —  सुख ———–     माता ,सांसारिक सुख

पांचवा भाव — विद्या ,संतान ,त्रिकोण — संतान , शिक्षा

छठा भाव —- रोग ,शत्रु ——–    रोग ,शत्रु ,संघर्ष ,कर्ज

सातवां भाव –-  पति-पत्नी ——     पति –पत्नी ,व्यवसाय

आठवां भाव –-   मृत्यु    —————-     आयु

नौवां भाव —–  भाग्य —————      भाग्य ,धर्म

दसवां भाव —   नौकरी ,राज्य ——   कर्म में सफलता

ग्यारहवां भाव —  आय ————      आय

बारहवां भाव —–  व्यय ———-   व्यय ,विदेश यात्रा

 

               12 भाव के कारक ग्रह

           पहला भाव ————–    सूर्य

           दूसरा भाव ————-     गुरु

           तीसरा भाव ———–     मंगल

           चौथा भाव ———      चंद्र ,बुध

           पांचवां भाव ————     गुरु

           छठवां भाव ———    शनि ,मंगल

           सातवां भाव ————    शुक्र

           आठवां भाव ————-    शनि

           नौवां भाव ————–    सूर्य ,गुरु

           दसवां भाव ——    सूर्य ,बुध ,गुरु ,शनि

           ग्यारहवां भाव ——        गुरु

           बारहवां भाव ————-   शनि

                    लग्न

कुंडली के पहले भाव ( घर ) को लग्न कहते हैं . कुल 12 लग्न होते हैं .कुल बारह प्रकार के मुख्य व्यक्तित्व या स्वभाव होते हैं . हर लग्न के कुंडली की विशेषताएं अलग होती हैं . क्योंकि लग्न का मालिक (अधिपति ) हर लग्न में अलग होता है . मालिक अगर एक हो भी लेकिन राशि की विशेषता का अलग – अलग प्रभाव रहता है .जैसे मेष लग्न और वृश्चिक लग्न का मालिक मंगल होता है . वृष और तुला लग्न का मालिक शुक्र होता है .मिथुन और कन्या लग्न का मालिक बुध होता है .धनु और मीन लग्न का मालिक गुरु होता है .मकर और कुम्भ लग्न का मालिक शनि होता है .

अलग –अलग लग्न में भावेश याने भाव का मालिक (ग्रह स्वामी )का स्थान बदल जाता है .एक ही ग्रह का व्यवहार (असर )अलग –अलग भावों में अलग –अलग होता है .

 

  12 भावों में 9 ग्रहों की स्थिति निम्नलिखित हैं :–

                  मेष लग्न

 

      पहला  भाव –मंगल .दूसरा भाव –शुक्र .तीसरा भाव –बुध

       चौथा भाव –चंद्र .पांचवा भाव –सूर्य .छटवां भाव –बुध

      सातवां भाव –शुक्र .आठवां भाव –मंगल .नौवां भाव – गुरु

     दसवां भाव –शनि .ग्यारहवां भाव –शनि .बारहवां भाव –गुरु

             वृष लग्न

        पहला भाव –शुक्र .दूसरा भाव –बुध .तीसरा भाव –चंद्र

     चौथा भाव – सूर्य .पांचवां भाव –बुध .छटवां भाव –शुक्र

    सातवां भाव – मंगल.आठवां भाव –गुरु  . नौवां भाव – शनि

   दसवां भाव –शनि .ग्यारहवां भाव –गुरु  .बारहवां भाव –मंगल

 

                 मिथुन लग्न

     पहला भाव—बुध. दूसरा भाव—चंद्र. तीसरा भाव—सूर्य

      चौथा भाव—बुध. पांचवां भाव—शुक्र. छटवां भाव– मंगल

     सातवां भाव – गुरु.आठवां भाव – शनि .नौवां भाव – शनि

  दसवां भाव – गुरु .ग्यारहवां भाव – मंगल .बारहवां भाव – शुक्र

                  कर्क लग्न

     पहला भाव— चंद्र. दूसरा भाव— सूर्य. तीसरा भाव— बुध

     चौथा भाव— शुक्र. पांचवां भाव— मंगल. छटवां भाव– गुरु

  सातवां भाव – शनि  आठवां भाव शनि – .नौवां भाव – गुरु

  दसवां भाव – मंगल .ग्यारहवां भाव – शुक्र .बारहवां भाव – बुध

                  सिंह लग्न

   पहला भाव— सूर्य . दूसरा भाव— बुध . तीसरा भाव— शुक्र

    चौथा भाव— मंगल . पांचवां भाव— गुरु . छटवां भाव– शनि

    सातवां भाव – शनि .आठवां भाव गुरु – .नौवां भाव – मंगल

   दसवां भाव – शुक्र .ग्यारहवां भाव – बुध .बारहवां भाव – चंद्र

                  कन्या लग्न

     पहला भाव— बुध. दूसरा भाव— शुक्र. तीसरा भाव— मंगल

    चौथा भाव— गुरु . पांचवां भाव— शनि . छटवां भाव– शनि

    सातवां भाव – गुरु  .आठवां भाव – मंगल.नौवां भाव – शुक्र

   दसवां भाव – बुध  .ग्यारहवां भाव – चंद्र .बारहवां भाव – सूर्य

                  तुला लग्न

    पहला भाव— शुक्र . दूसरा भाव— मंगल. तीसरा भाव— गुरु

     चौथा भाव— शनि. पांचवां भाव— शनि . छटवां भाव– गुरु

    सातवां भाव – मंगल .आठवां भाव – शुक्र.नौवां भाव – बुध

     दसवां भाव – चंद्र.ग्यारहवां भाव – सूर्य.बारहवां भाव – बुध

                  वृश्चिक लग्न

 पहला भाव—मंगल. दूसरा भाव— गुरु. तीसरा भाव— शनि

 चौथा भाव— शनि. पांचवां भाव— गुरु. छटवां भाव– मंगल

 सातवां भाव – शुक्र.आठवां भाव – बुध.नौवां भाव – चंद्र

 दसवां भाव सूर्य –.ग्यारहवां भाव – बुध.बारहवां भाव – शुक्र

                   धनु लग्न

   पहला भाव— गुरु. दूसरा भाव— शनि. तीसरा भाव— शनि

     चौथा भाव— गुरु. पांचवां भाव— मंगल. छटवां भाव– शुक्र

    सातवां भाव – बुध.आठवां भाव- चंद्र. नौवां भाव – सूर्य.

   दसवां भाव- बुध .ग्यारहवां भाव- शुक्र. बारहवां भाव – मंगल

                   मकर लग्न

      पहला भाव— शनि . दूसरा भाव— शनि. तीसरा भाव— गुरु

      चौथा भाव— मंगल. पांचवां भाव— शुक्र. छटवां भाव– बुध

     सातवां भाव – चंद्र.आठवां भाव – सूर्य.नौवां भाव – बुध

    दसवां भाव -शुक्र .ग्यारहवां भाव- मंगल.बारहवां भाव – गुरु

                    कुंभ लग्न

   पहला भाव— शनि. दूसरा भाव— गुरु. तीसरा भाव— मंगल

    चौथा भाव— शुक्र. पांचवां भाव— बुध. छटवां भाव– चंद्र

    सातवां भाव – सूर्य.आठवां भाव – बुध.नौवां भाव – शुक्र

   दसवां भाव – मंगल.ग्यारहवां भाव गुरु -.बारहवां भाव – शनि

                  मीन लग्न

    पहला भाव— गुरु . दूसरा भाव— मंगल. तीसरा भाव— शुक्र.

     चौथा भाव— बुध. पांचवां भाव— चंद्र. छटवां भाव– सूर्य

     सातवां भाव- बुध.आठवां भाव – शुक्र.नौवां भाव – मंगल

    दसवां भाव- गुरु .ग्यारहवां भाव- शनि .बारहवां भाव – शनि

                                                     ग्रहों का प्रभाव

 

    जिस भाव में जो ग्रह बैठा है वहां अपना प्रभाव तो देता ही है .इसके अतिरिक्त ग्रह की दृष्टी जहाँ पड़ती है वहां भी असर डालता है .सभी ग्रहों की सातवीं दृष्टी होती है .इसके अतिरिक्त कुछ ग्रहों की विशेष दृष्टी भी है .मंगल अपने स्थान से चौथे ,सातवें और आठवें घर में दृष्टि डालता है .गुरु अपने स्थान से पांचवें ,सातवें और नौवें घर में दृष्टी डालता है .शनि अपने स्थान से तीसरे ,सातवें और दसवें घर में दृष्टि डालता है .

                     दशा

मनुष्य की आयु 120 वर्ष का मान कर विंशोतरी दशा का निर्माण हुआ है .जातक का जन्म जिस नक्षत्र में होता है उस नक्षत्र के स्वामी ग्रह की महादशा उस समय चलती रहती है .महादशाओं का क्रम और अवधि निम्नलिखित है .

                      महादशा

         ग्रह                अवधि

          सूर्य   ————      6 वर्ष

      चंद्र   ————     10 वर्ष

      मंगल   ———-      7 वर्ष

      राहु     ————-   18 वर्ष

      गुरु    ————–   16 वर्ष

      शनि   —————   19 वर्ष

      बुध    ————–   17 वर्ष

                                            केतु    —————-  7 वर्ष

      शुक्र    —————   20 वर्ष

 

                     कुल 120 वर्ष

     इसी अनुपात में हर ग्रह की महादशा के अन्दर नौ ग्रहों की अन्तर्दशा चलती है .और हर ग्रह के अन्तर्दशा के अन्दर नौ ग्रहों की प्रत्यंतर दशा चलती है .

        कुंडली से सम्बंधित इतनी जानकारी हर सामान्य व्यक्ति को होनी चाहिए .

 

 

 

 

 

 

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