जब भी नये कपड़ों में

 

जब भी नये कपड़ों में रूप तेरा निखरता होगा

तारीफ करने वालों का ना होना अखरता होगा

 

मैंने तो बरसों पहले ही तेरी तारीफ सुनी थी

हवाओं में भी अब तो नाम तेरा बिखरता होगा

 

मात खा गया बहार का शबाब भी सामने तेरे

फूल भी जूड़े में तेरे लगने से मुकरता होगा

 

आँखों में भरा नशा कितना भला कौन जानेगा

इन्हें देख कर धतूरे का नशा भी उतरता होगा

 

हरदम तुझे देखने की चाह है नहीं किसमें भला

तुझे देख दरवाजे का सुग्गा भी सँवरता होगा

 

Leave a Reply

Be the First to Comment!

avatar
  Subscribe  
Notify of