दिल के दरवाजे में

 

दिल के दरवाजे में तेरे कोई दरवान न था

डरता रहा हाथों में मेरे कोई फ़रमान न था

 

आँखों के रस्ते दिल में उतरना बहुत बड़ी बात है

यह मेहरबानी रही तेरी वरना आसान न था

 

गर्दिशे दौराँ में लोग कतरा के निकल जाते थे

देखी बेरुखी ऐसी कि लगे जान पहचान न था

 

फाकाकशी में मौत कोई इज्ज़त की बात न थी तब

ज़िंदगी की सलामती से आगे कोई अरमान न था

 

लाखों लोग थे जिन्होंने दूसरों के लिए महल बनाए

उनकी बदकिस्मती कि अपना कोई मकान न था

 

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