देवनागरी और हिंदी की नई लिपि ‘ होडो़ सेंणा लिपि ‘ में क्या फर्क है ?

एक हजार साल पुरानी देवनागरी लिपि और देवनागरी लिपि से विकसित हिंदी की नई लिपि ‘ होडो़ सेंणा लिपि ‘ में क्या फर्क है  ?

1.देवनागरी के ग, ण और श में आकार लगे होने का भ्रम होता है। होडो़ सेंणा लिपि में ऐसा कोई वर्ण नहीं है।

2.देवनागरी में ‘ र ‘ ध्वनि के लिए कई संकेत चिह्न हैं । होडो़ सेंणा में सिर्फ एक ही है।

3. संयुक्ताक्षरों के कारण देवनागरी में अच्छी खासी परेशानी है। इसका समाधान होडो़ सेंणा में है। नई लिपि में आधे अक्षरों का व्यवहार नहीं होता है। जिसके कारण ध्वनि संकेत चिह्नों में कमी आई है।

4. स्वर वर्ण और इनकी मात्राओं को दर्शाने की व्यवस्था बदली गयी है। जिसके कारण कई अक्षरों का इस्तेमाल नहीं होता है। इस तरह से कुछ संकेत चिह्नों की आवश्यकता नहीं रह गयी है।

5. महाप्राण ध्वनियों की दूसरी व्यवस्था की गई है। जिसके कारण कई अक्षरों की आवश्यकता नहीं रही।

6. समय की मात्राओं में चौथाई मात्रा का प्रावधान जोडा़ गया है। जिसके कारण उच्चारण को स्पष्ट लिखना आसान हुआ है।

7. इन परिवर्तनों से बहुत कम याने 45 ( पैंतालीस) संकेत चिह्नों से ही स्पष्ट वर्तनी की व्यवस्था हो जाती है। जबकि देवनागरी में 140 ( एक सौ चालीस) संकेत चिह्नों की आवश्यकता होती है। ( विराम चिह्नों को छोड़कर )

पूरी जानकारी वेबसाइट में उपलब्ध है —

www.hindikinailipi.com

 

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