निबौली शहद -सा लागे है आज

 

निबौली शहद -सा लागे है आज

पिया आजा ,  पिया आजा

कागा मुँडेर पे बोले है आज

पिया आजा  , पिया आजा

 

सामने दर्पण के खुद को भूल गई

गलती से सालन में काजल डाल गई

ठिठोली में सखियों से साँच बोल गई

धड़कन जिया की सताए है आज  । पिया …

 

लाल- लाल चूड़ियों बिन सूनी कलाई है

लाली बिन होंठों में कैसी ललाई है

प्रीत की काहे तूने ज्योत जलाई है

विरह ये तन -मन जलाये है आज  । पिया…

 

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