नैनों के तरकश में तीर

 

नैनों के तरकश में तीर रहने तो दो

काम आयेंगे फिर जरा सम्हलने तो दो

 

राहगीरों को तो राह नहीं सूझेगा

स्याह जुल्फों को अब जरा बिखरने तो दो

 

दीवानगी की हद का तो अभी पता नहीं

अरमानों को अब जरा मचलने तो दो

 

गुनहगार हथकड़ी में जकड़ा जाएगा

काली रात को अब जरा सरकने तो दो

 

सब्र का बाँध है टूटना तो है ही

दिल पे जमी बर्फ को जरा पिघलने तो दो

 

शाख से फल किसकी झोली में जाएंगे

देखो शाख को अब जरा लचकने तो दो

 

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