बेतरह शमअ से परवाने

 

बेतरह शमअ से परवाने इश्क करते हैं

अपनी चाहत में ये दीवाने मर ही मिटते हैं

 

जख्म पाई है जो वो वक्त की परछाई है

घाव भर जाएंगे सारे ये जितने रिसते हैं

 

लोग मतलब के लिए जोड़ते रिश्ते नाते हैं

बात इतनी बुरी ये मतलब के वक्त दिखते हैं

 

लाख कोशिश हो फिर भी कोई अपना न मिले

आप ही दिल में मुहब्बत के फूल खिलते हैं

 

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