लिपि शोधन की आवश्यकता है

#लिपि #शोधन की आवश्यकता है  !

 

पत्तों, कागजों और ताम्रपत्रों पर लिखे हजारों #प्राचीन लिपियों में लिखे #पांडुलिपियों को #लिपि विशेषज्ञ नहीं पढ़ पा रहे हैं। इसका कारण सिर्फ यही है कि पहले की लिपियाँ #अल्पविकसित या #अविकसित हैं। कुछ ऐसी #अल्पविकसित या #अविकसित #लिपियाँ अभी भी प्रचलन में हैं।

जैसे जैसे भाषाएँ विकास के पथ पर अग्रसर होने लगीं उन भाषाओं की लिपियाँ भी #भाषा की ध्वनियों को लिखने में अधिक #सक्षम होती गईं । लेकिन उनकी #सीमाएँ अपनी #भाषा के #उच्चारण को लिखने तक ही #सीमित रहीं।

अब #हिंदी #भाषा को लिखने पढ़ने वालों की संख्या एक अरब उनतीस करोड़ से ज्यादा हो चुकी है और #संसार की सबसे अधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली #भाषा बन गई है।

#हिंदी की #लिपि #देवनागरी एक हजार साल #पुरानी है। उस समय न तो #टाइपराइटर था और न कम्प्यूटर। #देवनागरी से #हिंदी लिखने में कोई #असुविधा नहीं थी। अब #कम्प्यूटर #युग में लिपि के शोधन की आवश्यकता पडी़, क्योंकि #देवनागरी लिपि की #कमियाँ खटकने लगी।

अन्य #भारतीय भाषाओं की #लिपियाँ भी ब्राह्मी लिपि से ही #विकसित हो कर बनी है। उन लिपियों में भी #कमियाँ हैं क्योंकि उन लिपियों की उम्र भी एक हजार से बारह सौ वर्ष की हो चुकी है। अब जब #हिंदी देश की प्रथम #राजभाषा है और #संसार की सबसे अधिक बोली जाने वाली #भाषा है तो उन क्षेत्रीय लिपियों में हिंदी के शब्दों को शुद्ध #उच्चारण के साथ लिखना आवश्यक हो गया है। लेकिन यह कैसे होगा, जबकि क्षेत्रीय लिपियों में हिंदी के सभी उच्चारणों को शुद्ध रूप में #लिपिबद्ध करने की #व्यवस्था ही नहीं है।

लिपि एक टूल है जिसके जरिए हम भाषाओं को सही #उच्चारण के साथ लिख सकते हैं। हिंदी की नई लिपि -” होडो़ सेंणा लिपि ” एक विकसित #लिपि है। इस लिपि में हिंदी के अलावे अनेक #भारतीय भाषाओं को भी लिख सकते हैं  ।

रवीन्द्र नाथ सुलंकी

( लिपि शोधक)

www.hindikinailipi.com

Leave a Reply

Be the First to Comment!

avatar
  Subscribe  
Notify of