विचार – विमर्श / DISCUSSION

हिंदी का वांछित विकास नहीं हो पा रहा है क्यों कि देवनागरी लिपि ( devnagri script ) एक हजार साल पुरानी है | इस लिपि में अनेक कमियां हैं | बहुत सारे लोग ऐसा समझते हैं कि ढाई हजार साल पुरानी ROMAN SCRIPT में हिंदी लिखना आसान है | मेरा नम्र निवेदन है कि कृपया अपनी पूर्व धारणा को कुछ समय के लिए किनारे कर दें और ढाई हजार साल पुरानी लिपि के गुण –दोष देखें —

romam scipt लगभग ढाई हजार ( 2500 ) वर्ष पुरानी है | गुण –अवगुण —

1 . एक ध्वनि के लिए कई ध्वनि चिह्न हैं |

2 . एक संकेत से कई धनियों की अविव्यंजना होती है |

3 . दो ध्वनि संकेतों को मिला कर महाप्राण ध्वनियों का निर्माण करते हैं |

4 . सभी अनुनासिक ध्वनियाँ नहीं है |

5 . लिपि में सौन्दर्य है |

6 . अनावश्यक वर्णों का व्यवहार है |

7 . मात्राओं के स्पष्ट संकेत नहीं है |

अब थोड़ा विस्तार से देखें —

( 1 ) अक्षरों के नाम से वर्ण की ध्वनि के सम्बन्ध में असमंजस | “ G “ ( जी ) से “ ग “ , “ H “( एच ) से “ ह “ और “ W “ ( डब्लू ) से “ व “ का उच्चारण होता है |

( 2 ) बड़े और छोटे अक्षरों के कारण एक ही वर्ण के लिए दो संकेतों को याद करना और प्रयोग में लाना पड़ता है |

( 3 ) अनावश्यक अक्षरों का प्रयोग होता है कभी शुरू में , कभी बीच में और कभी अंत में | जैसे –knife ,often , comb इत्यादि |

( 4 ) एक वर्ण से कई उच्चारण होते हैं | जैसे –

A ( a ) ant –एन्ट – ए  

bat – बैट – ऐ

mark – मार्क – आ

main – मेन – ए

sea – सी – इ

saw – सो – ओ

aunt – अंट – अ

call – कॉल – ऑ

BHARAT लिखने पर उसका उच्चारण भारत , भरत , भरात , भारट ,भराट भी हो सकता है |

E ( e ) let – लेट – ए

week – वीक – ई

sea – सी – इ इत्यादि |

I ( i ) kit – किट – इ

kite – काईट – आई

live – लाइव और लिव दोनों उच्चारण सही है |

O ( o ) do – डू – उ

go – गो – ओ

blood –ब्लड – अ  इत्यादि |

u ( u ) tub – टब – अ

tube – टिउब – यु इत्यादि |

Y ( y ) my – माई – आई

yard –यार्ड – य

baby – बेबी – ई इत्यादि |

C का प्रयोग कहीं “ क “ के लिए तो कहीं “ च “ और कहीं स के लिए होता है | call , change , cell इत्यादि |

th का उच्चारण कभी “ थ “ कभी “ द “ और “ ठ “होता है | thanks , weather , lathi इत्यादि |

( 5 ) एक ध्वनि के लिए अलग – अलग वर्णों की सहायता ली जाती है |

“ क “ के उच्चारण के लिए –

cut – कट , kite – काईट , queen –क्वीन , school –स्कूल , check – चेक ,cheque – चेक इत्यादि |

“ ज “ के उच्चारण के लिए –

jug – जग , zig – जिग , gem –जेम इत्यादि |

“ फ “ के उच्चारण के लिए –

fan – फैन , physics – फिजिक्स इत्यादि |

“ इ “ के उच्चारण के लिए –

year – इयर , eye – आई , lip – लिप इत्यादि |

( 6 ) स्वतंत्र महाप्राण ध्वनि का संकेत चिह्न नहीं है | ” H “ लगा कर महाप्राण ध्वनि बनाई जाती है |

( 7 ) “ द “ का उच्चारण नहीं है | “ D “ से “ द “ और “ ड “दोनों का काम चलता है |

( 8 ) “ र “ और “ ड़ “ के लिए एक ही संकेत व्यवहार में आता है |

( 9 ) “ ढ़ “ लिखने की व्यवस्था नहीं है |

( 10 ) मात्राओं के स्पष्ट संकेत नहीं है | BHARAT लिखने पर भारत , भरत या भरात हो सकता है |

अब देवनागरी लिपि की कमियों को जानें —

 

देवनागरी लिपि की कमियाँ

  1. ‘ग’ ‘ण’ और ‘श’ में ‘आ’ की मात्रा लगे होने का भ्रम होता है।

  2. एक ही ध्वनि के लिए अलग-अलग चिन्हों से जटिलता उत्पन्न हो गई है। देखें :-

(क)  ‘र’ के उच्चारण के लिए अनेक चिन्ह :

(ख)

    

  1. लिपि और उच्चारण में सामंजस्य नहीं है। देखें :-

              

(क) ‘द्वार’ लिखे शब्द को देखने से लगता है कि ‘व’ की आधी मात्रा होगी और ‘द’ का उच्चारण आकार के साथ दो मात्राओं का होगा। परन्तु ऐसा नहीं है। इसी तरह वृद्ध ,श्रद्धा ,ह्रस्व , इत्यादि में भी भ्रम होता है।

(ख) संयुक्ताक्षर में ‘र’ का योग कभी किसी अक्षर के पहले और कभी बाद में होता है।  ‘फर्क’ में ‘क’ से पहले ‘र’ का उच्चारण होता है । और ‘चक्र’ में ‘क’ के बाद ‘र’ का उच्चारण होता है।

(ग) संयुक्ताक्षर में ह्रस्व इकार कहीं-कहीं काफी पहले लगता है। ‘पश्चिम’ शब्द को देखने से लगता है कि ‘श’ में भी इकार लगा है । जबकि उच्चारण से पता लगता है कि इकार सिर्फ ‘च’ में लगा है। ऐसे ही सैकड़ों शब्द हैं। जैसेः- निश्चित , निश्चिंत, वृद्धि , स्थिर ,चन्द्रिका ,शक्ति इत्यादि।                                   

(घ)

इत्यादि संयुक्त होने पर लिखना कठिन होता है तथा उच्चारण की भी दुविधा रहती है।

जैसेः-

 

(ङ) ‘य’ से  युक्त  होने  वाले  वर्णों  का  उच्चारण  लिपि  द्वारा स्पष्ट नहीं  होता  है। ‘य’ से युक्त होने वाले वर्णों  में कभी ‘ए’ की और कभी ‘इ’ की  मात्रा  आ  जाती  है । इस अस्पष्टता  से  उच्चारण की दुविधा  रहती है।

जैसे :-

(च)  ‘व’ से  युक्त  होने  वाले  वर्णों  का  उच्चारण    लिपि  द्वारा  स्पष्ट नहीं होता  है। ‘व’ से  जुड़ने  वाले  आधी  मात्रा  के  उच्चारण  में ‘ओ’ की मात्रा आ जाती  है। जब कि लिखे हुए में ‘ओ’ की  मात्रा  लिखी  नहीं  रहती  है।

जैसे :-

(छ) सभी व्यंजन वर्णों  के  उच्चारण  के  अंत  में ‘अ’ का उच्चारण  होता  है  जो  स्वर  वर्ण की ध्वनि है। परन्तु जब ‘स’ किसी अन्य  वर्ण  के  प्रारम्भ  में  युक्त  होता  है  तो  प्रारम्भ में  स्वर वर्ण  का  उच्चारण  होता  है।                          जैसे :-

  

यह  लिपि  द्वारा स्पष्ट नहीं होता है ।

(ज) ‘ख्याल’ और ‘ख्याति’ में ‘ख’ के  उच्चारण  में  भेद है। जब कि दोनों  में  कोई  भी  स्वर  की मात्रा नहीं  है। लिपि  में इस भेद को  दर्शाने  की  व्यवस्था  नहीं  है।

  1. अनुनासिक ध्वनियों  के  प्रयोग  में  दुविधा  रहती  है।  लिखने और  टंकण  में  सुविधा के  लिए गलत संकेत व्यवहार  में  आ गए हैं

जैसेः-

  1. कम्प्युटर द्वारा देवनागरी टंकण में लगभग 140 नों की आवश्यकता  होती  है।  

(विराम  और  अंकों  के चिह्नों को छोड़कर ) होड़ो सेंणा के 45 चिह्नों के मुकाबले देवनागरी के 140 चिह्न काफी अधिक हैं ।

देवनागरी के 140  चिह्न