शोखी भरी नजरों में

 

शोखी भरी नजरों में कहीं ये प्यार तो नहीं

बदले हुए तेवर में कहीं इजहार तो नहीं

 

बेकार है ये चाँदनी लगता तेरे बगैर

मुस्कराहट में तेरी कहीं इकरार तो नहीं

 

सितारे जगे हुए हैं अब क्यूँ सो नहीं जाती

जागी हुई आँखों में कहीं इसरार तो नहीं

 

मंजिल की क्या पड़ी है जब हमसफ़र हो साथ

दिल के तार छेड़ दो कहीं तकरार तो नहीं

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