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हिंदी भाषा के लिए प्रयुक्त देवनागरी लिपि एक हजार साल पुरानी है | लिपि में अनेक कमियां हैं |हिंदी पढ़ने ,लिखने और टाइपिंग में कठिनाई का कारण पुरानी देवनागरी लिपि का होना है | यही कारण है कि हिंदी का वांछित विकास नहीं हो पा रहा है |लिपि को अपग्रेड करने की आवश्यकता है |
होड़ो सेंणा लिपि एक विकसित लिपि है |यह लिपि देवनागरी की अपेक्षा आसन है |टाइपिंग में देवनागरी के 140 संकेत चिह्न और होड़ो सेंणा लिपि में मात्र 45 संकेत चिह्न की आवश्यकता होती है |होड़ो सेंणा लिपि का निर्माण विशेष रूप से हिंदी और भारत की प्राचीनतम औस्ट्रिक मुंडा भाषाओँ (मुंडारी ,संथाली और हो मुंडा ) के लिए किया गया है |इस लिपि में कुछ अतिरिक्त ध्वनि चिह्न जोड़ कर अन्य अनेक भारतीय भाषाएँ भी लिखी जा सकेंगी |देश भर की सभी भाषाओं के लिए एक ही लिपि होने पर लोग आसानी से अन्य प्रादेशिक भाषाएँ भी सीख सकेंगे |देश को एक सूत्र में बांधने की दिशा में यह अच्छा प्रयास हो सकता है |