Frequently Asked Questions (FAQ)

Q – HINDI KI NAI LIPI “होड़ो सेंणा लिपि” (HODO SENA LIPI) को क्यों अपनाएँ ?

  • आस्ट्रो – एशियाटिक भाषा (AUSTRO-ASIATC LANGUAGES) परिवार को आस्ट्रिक या आग्नेय परिवार भी कहते हैं | इसके दो मुख्य वर्गों में से पश्चिमी वर्ग को मुंडारी भाषा समूह कहते हैं | मुन्डारी भाषा समूह के तीन मुख्य भाषाओं – मुंडारी(MUNDARI)  संथाली(SANTHALI) और हो(HO) की समानताओं को देखने पर स्पष्ट पता चलता है कि पूर्व में तीनों भाषाएं एक ही थीं | HINDI KI NAI LIPI “होड़ो सेंणा लिपि” ( HODO SENA LIPI) में मुंडारी(MUNDARI) भाषा समूह के सभी भाषाओं को अच्छी तरह से लिपिबद्ध किया जा सकता है | मुंडारी(MUNDARI) भाषाएं भारत की प्राचीनतम होने के वावजूद इनमें साहित्य की कमी है | अगर सभी मुंडारी भाषाएं एकजुट होकर साहित्य सृजन की दिशा में बढ़ें तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी | इन भाषाओं को जोड़ने का काम होड़ो सेंणा लिपि के द्वारा हो सकता है | कुछ लोग इसे निश्चित ही अव्यवहारिक मानें ; पर एक प्रत्यक्ष उदहारण हिंदी की है जिसमें आठ बोलियों – ब्रज , खड़ीबोली , बुन्देली , हरियाणी , कनौजी , अवधी , बघेली और छत्तीसगढ़ी का समावेश है | इसलिए एक सशक्त भाषा के पुनर्निर्माण हेतु होड़ो सेंणा लिपि को अपनाना समय की माँग मानी जा सकती है |

–  रवीन्द्र नाथ सुलंकी