JOKES 2

  • अध्यापक –“ तुम दो सरल प्रश्नों के उत्तर देना पसंद करोगे या एक कठिन प्रश्न का ? ”

बबलू –“ एक कठिन प्रश्न का | ”

अध्यापक – “ तो बताओ पहले मुर्गी हुई या अंडा ? ”

बबलू – “ अंडा | ”

अध्यापक – “ कैसे ? ”

बबलू – “ सर , आप तो यह दूसरा सवाल पूछ रहे हैं | ”

  • रेल के डिब्बे में राजा की माँ ने राजा से कहा – “ चुपचाप बैठो रहो , शरारत की तो मारूंगी | ”

राजा –“ तुमने मारा तो मैं टिकट चेकर को अपनी उम्र बता दूंगा | ”

  • रमेश –“ दादी जी , आप बादाम खाती हैं क्या ? ”

दादी –“ नहीं बेटा , मेरे दांत गिर गए हैं | ”

रमेश –“ तब ठीक है , ये बादाम रख लीजिए , मैं स्कूल से लौटने पर ले लूँगा | ”

  • बाप – “ बेटा गम न करो , भाग्य में फेल होना लिखा था , सो हो गए | ”

बेटा – “ तब तो बहुत अच्छा हुआ | यदि मैं मेहनत करता तो सारी मेहनत बेकार जाती | ”

  • राकेश ने होटल मैनेजर से पूछा – “ बाहर आपने बोर्ड पर लिखा है कि आपके होटल में कद्दू और अंगूर की सब्जी बनी है | लेकिन मैंने आज तक नहीं सुना कि कद्दू और अंगूर मिला कर सब्जी बनाई जाती है | अच्छा , यह बताओ सब्जी में अंगूर कितने मिलाये गए हैं ? ”

मैनेजर – “ दोनों 50 -50 प्रतिशत याने दस कद्दू और दस अंगूर |”

  • विजय का एक बार अपनी पत्नी से किसी बात पर झगड़ा हो गया | दोनों ने आपस में बात बंद कर दी | दूसरे दिन किसी जरूरी काम से विजय को सुबह सात बजे कहीं पहुंचना था | उसने एक कागज पर लिख कर पत्नी को दिया – “ मुझे सुबह 6 बजे जगा देना | तुम्हारा पति | ”

दूसरे दिन सुबह जब विजय की आँख खुली तो साढ़े सात बज चुके थे और उसे बिस्तर पर एक पर्ची रखी हुई मिली | पर्ची पर लिखा था –“ उठो , 6 बज गए हैं | तुम्हारी पत्नी | ”

  • विनोद को हलुआ खाने का बड़ा शौक था | वह एक किराने वाले के पास पहुंचा और बोला – “ आपके पास सूजी है ? ”

दुकानदार – “ जी हाँ ! ”

विनोद – “ घी है ? ”

दुकानदार – “ है ! ”

विनोद – “ शक्कर है ? ”

दुकानदार – “ हाँ है | ”

विनोद – “ तब आप बहुत बड़े मूर्ख हैं | हलुआ क्यों नहीं बनाते ? ”

  • विजय ने हलवाई से लड्डू खरीदे , किन्तु तुरन्त वापस कर दिए और कहा –“ मुझे कलाकंद दो | ”

कलाकंद भी विजय ने तुरन्त वापस कर दिए और जलेबियाँ ले लीं | फिर जब वह चलने लगा तो हलवाई ने कहा –“ पैसे | ”

विजय – “ कैसे पैसे ? ”

हलवाई – “ जलेबियों के | ”

विजय – “ जलेबियाँ तो मैंने कलाकंद के बदले में ली है | ”

हलवाई – “ तो कलाकंद के पैसे दो | ”

विजय – “ कलाकंद तो मैंने लड्डुओं के बदले में लिया था | ”

हलवाई – “ तो लड्डू के पैसे दो | ”

विजय – “ वाह ! लड्डू तो मैंने वापस कर दिए | ”

  • गंजा व्यक्ति – “ मेरे सिर पर तो बाल बहुत कम हैं | मुझसे तो तुम्हें कम पैसे लेने चाहिए | ”

नाई – “ जनाब ! मैं आपसे बाल काटने के पैसे थोड़े न लेता हूँ , बाल ढूँढने के पैसे लेता हूँ जी ! ”

  • एक दिन अतुल और रवीन्द्र होटल में गए और एक प्लेट फ्राई मछली लाने का ऑर्डर दिया | वेटर प्लेट में एक छोटा तथा एक बड़ा टुकड़ा रख कर लाया | तब रवीन्द्र बड़ा टुकड़ा उठाकर खाने लगा तो अतुल बोला – “ तुझमें बिलकुल सभ्यता नहीं है , तुम्हारी जगह मैं होता तो स्वयं छोटा टुकड़ा उठता | ”

“ तो अब शिकायत क्यों कर रहे हो , तुम्हे छोटा टुकड़ा मिल गया | रवीन्द्र ने उत्तर दिया | ”

  • दीनू एक दिन रात के 12 बजे एक बिल्ली को नहला रहे थे | बिल्ली की आवाज सुनकर पड़ोसी उठा और बिल्ली को नहलाता देखकर वह बोला – “ अरे भाई रात को इस बिल्ली को क्यों नहला रहे हो यह मर जाएगी | ”

दीनू ने कहा – “ नहीं जी , इसको तो रात में नहाने की आदत है |” यह सुन कर पड़ोसी वापस चला गया |

कुछ देर बाद दीनू के रोने की आवाज सुनकर पड़ोसी फिर उठा और उसको रोते देखकर बोला – “ अरे भाई अब रोते क्यों हो ? ”

दीनू ने उत्तर दिया – “ बिल्ली मर गई |”

पड़ोसी ने कहा – “ मैं तो पहले ही कह रहा था कि रात में मत नहलाओ यह मर जाएगी | ”

दीनू ने उत्तर दिया – “ नहलाने से नहीं मरी है | इसको तो नहलाकर जब निचोड़ा तो यह मर गई |”

  • तीन डाक्टर आपस में कह रहे थे कि मैं बिना देखे बता दूंगा कि आदमी की कहाँ की हड्डी टूटी है | तभी सामने से चौधरी लंगड़ाता हुआ निकला | पहले डाक्टर ने कहा – “ इसके घुटने की हड्डी टूटी है |”

दूसरे ने कहा – “ इसकी कमर की हड्डी टूटी है | ”

तीसरे ने कहा – “ इसके पैर के एड़ी की हड्डी टूटी है | ”

फिर तीनों डाक्टर जल्दी से उस आदमी के पास गए | तीनों ने पूछा – “ भाई आपकी कहाँ की हड्डी टूटी है ? ” चौधरी ने उत्तर दिया – “ मेरी कहीं की भी हड्डी नहीं टूटी है , मेरी चप्पल का फीता टूट गया है इसलिए लंगड़ा रहा हूँ | ”

  • पड़ोसन – “ मैंने कहा क्या कर रही हो बहन ? ”

दूसरी पड़ोसन – “ झाड़ू लगा रही हूँ | ”

पड़ोसन – “ यहीं आकर लगा लो ना , कुछ गप –शप भी हो जाएगी | ”

  • रेलगाड़ी में एक मुसाफिर ने दूसरे मुसाफिर से कहा – “ मेहरबानी करके मुझे अपना चश्मा थोड़ी देर के लिए देंगे | ”

दूसरे ने चश्मा उतार कर दे दिया |

चश्मा लेकर मुसाफिर फिर कहने लगा – “ चूँकि आप चश्मे के बिना पढ़ नहीं पायेंगे , इसलिए अब अपना अखबार भी इधर बढ़ा दीजिये | ”

  • चलती ट्रेन के स्लीपर में ऊपर वाले मुसाफिर की नींद खुली तो झुक कर नीचे वाले से बोला – “ भाई साहब क्या बजा है ? ”

“ बज के पाँच | ”

थोड़ी देर बाद समझने की कोशिश कर चुकने के बाद उन्होंने फिर पूछा – “ भाई साहब कितना बजा है ? ”

“ बज के दस | ”जवाब मिला |

“ क्या बज के पांच ,क्या बज के दस लगा रखा है | साफ –साफ बताते क्यों नहीं कि क्या टाइम हुआ है | ” डांटते हुए ऊपर के मुसाफिर ने कहा |

नीचे वाले ने अपनी घड़ी दिखाते हुए कहा –“ भाई साहब , जब छोटी सूई नहीं है तो क्या बताऊँ , आप ही बताओ | ”

  • रेल के एक डिब्बे में बैठी कुछ स्त्रियाँ आपस में बात –चीत कर रही थीं | वे सभी अपनी –अपनी उम्र कम कर के बता रही थीं | एक चालीस वर्षीय महिला ने कहा – “ मैं तो पच्चीस वर्ष की हूँ | ”

सैंतीस वर्षीय अनुराधा ने कहा – “ मेरी आयु छब्बीस वर्ष है | ”

और तीसरी रमा जोशी ने कहा – “ मैं तो सोलह की हूँ | ”

ऊपर की बर्थ पर बैठा सुरेश उनकी सारी बातें सुन रहा था | जब उनसे रहा न गया तो वह ऊपर से धड़ाम से कूद पड़ा | उन स्त्रियों ने अचकचा कर डांटते हुए कहा – “ अरे तुम कहाँ से आ गए ? ”

“ मैं तो अभी –अभी पैदा हुआ हूँ |” बीस वर्षीय सुरेश बोला |

  • एक बार दो आदमी आपस में कहीं मिले | एक ने दूसरे से कहा –“ क्यों न किसी होटल में चल कर बैठें | ”

दूसरा बोला – “ चलूँगा लेकिन एक शर्त है कि वहां खाने पीने का पहला ऑर्डर तुम दोगे और जो ऑर्डर देगा वही उसकी पेमेंट भी करेगा | ”

इस पर दूसरा आदमी बोला – “चलो मंजूर है |”

दोनों एक होटल में पहुँच गए | जब बैरा उनके पास आया तो शर्त के अनुसार पहले वाले ने उसे दो गिलास पानी लाने के लिए कह दिया | पानी आने पर शर्त के अनुसार अब दूसरे की बारी थी तो उसने ऑर्डर दिया – “ बैरा मीनू लाओ | ”

  • जब मीनू आ गया तो फिर पहले वाले ने कहा – “ मेरे लिए एक कप चाय लाओ और इसे धक्के मारकर बाहर निकाल दो | ”
  • मजिस्ट्रेट – “ श्रीमती ब्राइट , आपकी उम्र क्या है ? ”

मिसेज ब्राइट ( मुस्कुराकर ) – “ बीस वर्ष और कुछ महीने |”

मजिस्ट्रेट –“ कितने महीने ? ”

मिसेज ब्राइट – “ दो सौ | ”

  • जापान के दो कंजूस आपस में बहस कर रहे थे कि दोनों में से कौन ज्यादा कंजूस है | एक ने कहा – “ गर्मी के दिनों में मैं अपने पंखे को आधा ही खोलता हूँ ताकि आधा हिस्सा नया रहे | ”

दूसरे ने कहा – “ वाह ! यह भी कोई बात हुई | मैं तो अपना पंखा पूरा खोल देता हूँ लेकिन उसे जरा भी नहीं हिलाता सिर्फ अपने सिर को उसके सामने जल्दी –जल्दी दायें बाएं हिलाता रहता हूँ | ”

  • शिशु – “ माँ , पिताजी के सिर पर बाल क्यों नहीं हैं ? ”

माँ – “ बेटे , इसलिए कि वे बुद्धिमान हैं | ”

शिशु – “ माँ , तुम्हारे बाल इतने बड़े क्यों हैं ? ”

माँ – “ क्योंकि … चला जा यहाँ से और अपना सबक याद कर | ”

  • एक सिनेमाघर में एक पति – पत्नी लगभग सारा समय बैठे आपस में बातें ही करते रहे | साथ बैठे अन्य दर्शकों को यह बहुत बुरा लग रहा था | जब एक दर्शक से न रहा गया तो बोल बैठा – “ क्या तोते की तरह टाएँ – टाएँ लगा रखी है , कभी चुप नहीं होते | ”

इस बात पर पति ने बिगड़ कर पूछा – “ क्या आप मेरे बारे में कह रहे हैं |”

जबाब मिला –“ जी नहीं , आपको नहीं फिल्म वालों को कह रहा हूँ | शुरू से ही बोले जा रहे हैं , आप लोगों की बातचीत का एक शब्द भी नहीं सुनाई दिया | ”

  • प्रसूति गृह के डाक्टरों की सभा हो रही थी | विषय था , साहित्य और वातावरण का गर्भिणी पर प्रभाव | जब साहित्य की चर्चा चली तो एक ने कहा – “ साहित्य का प्रभाव तो मैंने प्रत्यक्ष देखा है | मैंने अपनी पत्नी को गर्भकाल में ‘ दो बहनें ’ किताब पढ़ने के लिए दी थी | उसने दो लड़कियों को जन्म दिया | ”

“ मैं आपकी बात का समर्थन करता हूँ | मैंने अपनी पत्नी को ‘ तीन लफंगे ’ पढ़ने के लिए दिया था | परिणाम स्वरुप तीन तिलंगे उपद्रव करने आ टपके | ”एक और डाक्टर ने कहा |

इस पर अन्य एक डाक्टर अचानक उठ कर जाने लगा | अन्य डाक्टरों ने पूछा –“ क्या हो गया ? कहाँ चल दिए ? ”

वह डाक्टर बोला – “ मेरी तो मति मारी गई थी | बीवी के पाँव भारी हैं | मैंने उसे पढ़ने के लिए ‘ अलीबाबा चालीस चोर ’ दे के आया हूँ | ”

  • एक सज्जन अपने दस वर्षीय पुत्र के साथ एक दरी बेचने वाले की दुकान में आये | उन्होंने कहा –“ मुझे एक बढ़िया दरी चाहिए | ”

दुकानदार ने अनेक प्रकार की दरियाँ दिखलाई | अंत में महाशय ने एक दरी पसंद करते हुए कहा – “ अच्छा तो यह दरी अभी लिए जा रहा हूँ , अगर कमरे में ठीक-ठीक आ गई तो रख लूँगा , वर्ना वापस कर दूंगा | ”

दुकानदार ने विश्वास कर लिया और कहा – “ लेकिन कल शाम तक वापस कर दीजियेगा | ”

उस सज्जन के बोलने से पहले ही उनका पुत्र बोल पड़ा – “ हमारे यहाँ दावत आज ही रात को ही है | ”

  • “ क्या यह लड़का आपका है , जो मेरे कपड़ों पर रेत डाल रहा है |” समुद्र के किनारे बैठे आदमी ने चिढ़कर कहा |

“ जी नहीं , यह तो मेरा भांजा है | मेरा लड़का तो उधर आपका छाता तोड़ रहा है | ” महिला ने सुलझे स्वर में उत्तर दिया |

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